सुरेंद्रसिंह रघुवंशी

 
गंजबासौदा// एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार द्वारा कानून में संशोधन कर संसद में बिल पारित करने के निर्णय पर। देशभर में इस कानून के खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन दिखाई देने लगे है। इस एक्ट के विरोध की आग में मुख्यमंत्री,मंत्री सांसद,विधायक सभी तपने लगे है। देश के सामान्य,पिछड़ा,अल्पसंख्यक वर्ग के तमाम संघठनो ने इस एक्ट को अनीति पूर्ण ओर लोगो के मौलिक अधिकारों का हनन करने वाल देश का काला कानून करार दिया है। इस एक्ट के विरोध में नगर के "मौलिक अधिकार बचाओ अभियान" संघठन ने कल 5 सितंबर को नगर में मौन जुलूस ओर 6 सितंबर को भारत बंद के आवाह्नन पर सम्पूर्ण नगर बन्द करने का आवाह्नन किया है।
 
संघठन द्वारा स्थानीय विश्राम गृह में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि यह देश का अनीतिपूर्ण वर्ग संघर्ष बढ़ाने वाला ओर देश की अखंडता को खंडित करने वाला कानून है।  इस कानून में यदि कोई निर्दोष व्यक्ति फसता है तो उसको बचाव का तक मौका इस संशोधित कानून में नही दिया गया है। 
    *सुप्रीम कोर्ट ने यह       बदलाब किया था*
 
वार्ता में इस कानून के सारे प्रावधानों पर चर्चा करते हुए बताया कि देश की शीर्ष अदालत ने अपने कानून में बदलाब करते हुए फैसला दिया था कि एससीएसटी एक्ट के मामले में तुरंत गिरफ्तारी न कि जाए पहले डीएसपी स्तर के अधिकारी 7 दिन के अंदर जांच करेंगे। जिसमें कोई भी बेगुनाह न फंसे। स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग की बात मानते हुए कहा था कि सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते है। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सक्षम अधिकारी की इजाजत के बाद ही की जा सकती है। 
 
*केंद्र सरकार ने यह बदलाब किया*
 
केंद्र सरकार ने एससीएसटी एक्ट में संशोधन विधेयक 2018 की जरिए मूल कानून मैं धारा 18 ए के साथ ही 25 नए प्रावधान जोड़कर कानून को ओर कड़ा कर दिया है। इस तरह से माननीय सुप्रीम कोर्ट के सारे प्रावधान रद्द हो गए।
 
*संशोधित नए प्रावधानों से यह होगा*
 
उन्होंने बताया कि अब इस कानून में प्रावधान किया गया है कि SC ST में केस दर्ज होते ही पहले गिरफ्तारी होगी है।आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकेगी। शिकायत होते ही सीधे जेल जाना होगा। हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी। एससी एसटी एक्ट में इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी जांच करेंगे ओर सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच एजेंसी का सक्षम अधिकारी से इजाजत लेना जरूरी नहीं होगा। 
 
*सांसद,विधायको का किया जायेगा घेराव*
 
इस कानून को मौलिक अधिकार बचाओ अभियान के सदस्यों ने देश का काला कानून नाम दिया है। संघठन के लोगो का कहना ही वह इस कानून को माननीय सुप्रीम कोर्ट के प्रावधानों के अनुसार चाहते है। और इसके लिए वह जब तक इस कानून में केंद्र सरकार द्वारा संशोधन नही किया जाता है तब तक आंदोलन किया जायेगा। यह आंदोलन शहर ले लेकर गाँव तक पहुचाया जायेगा। इसके साथ ही सभी पार्टियों के सांसदों,विधायको सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का घेराव कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। 
 
*यह कानून देश की अखंडता के लिए घातक*
 
उन्होंने बताया कि वह नही चाहते कि देश मे वर्ग संघर्ष की राजनीति हो यह कानून देश की अखंडता के लिए घातक है। इसलिए मौलिक अधिकार बचाओ संघठन ऐसे काले कानून का पुरजोर विरोध करता है। इस एक्ट के विरोध में कल 5 सितंबर को नगर के गाँधी चौक से स्टेशन श्री हनुमान मंदिर तक  बड़ी संख्या में मौन जुलूस निकाला जायेगा इसके बाद 6 सितंबर को भारत बंद के आव्हान पर नगर के व्यपारिक एवं सामाजिक संघटनो के सहयोग से शांतिपूर्ण रूप से नगर बन्द कराया जायेगा। 
इस अवसर पर विभिन्न समाजो के प्रतिनिधि
राजेश जैन, संजय कटारे  राजकुमार जैन,आमानसिंह राजपूत, सतीश जैन (मंत्री) संतोष शर्मा,नरेश रघुवंशी,सतनामसिंह राजपूत, रामकिशोर  शर्मा ,रामबल सिंह कुर्मी, श्रीमल जैन, सुरेश तनवानी, सत्यनारायण शर्मा,देवेंद्र सिंह जादोन, शैलेंद्र सक्सेना सतीश डागा, अशोक वर्मा, सुरेन्द्रसिंह रघुवंशी,लोकेंद्र सक्सेना, प्रमोद रघुवंशी सोहेल खान रवि चौरसिया सहित कई लोग उपस्थित थे।