सूरत | भारत समेत दुनियाभर में तांडव कर रहे कोरोना से निजात पाने की कोई दवाई अब तक उपलब्ध नहीं है| कोरोनाग्रस्त मरीज की हालत गंभीर होने पर वेन्टीलेटर लाइफ गार्ड का काम करता है| लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने से वेन्टीलेटर राज्य में सीमित संख्या में उपलब्ध हैं| ऐसी विकट परिस्थितियों के बीच राजकोट के बाद सूरत की सहजानंद नामक एक कंपनी सामने आई है, जिसने सात किलो का वेन्टीलेटर बनाया है| जिसकी कीमत रु. 50000 है| कंपनी का दावा है कि उसे मंजूरी मिलती है तो वह प्रति दिन 250 वेन्टीलेन्टर बना सकती है| किफायती और कम वजन का यह वेन्टीलेटर बिजली नहीं होने पर करीब 6 घंटों तक चल सकता है| गंभीर मरीजों के लिए आशीर्वाद स्वरूप इस वेन्टीलेटर का बीते दिन चिकित्सकों ने परीक्षण भी कर लिया है| सूरत की सहजानंद कंपनी द्वारा बनाए गए सबसे छोटे और केवल 7 किलो का वेन्टीलेटर 230 वोट बिजली में काम करता है| वेन्टीलेटर में एक बैटरी इनबिल्ट होने से बिजली नहीं होने पर यह 6 घंटे तक चल सकता है| किसी मरीज को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के दौरान यह वेन्टीलेटर काफी मददगार साबित होगा| वेन्टीलेटर में स्वदेशी बैटरी होने से पार्ट्स की भी कोई कमी होगी| कंपनी के सीईओ के मुताबिक फिलहाल 5 वेन्टीलेटर तैयार हो सकते हैं| यदि सरकार से मंजूरी मिल जाती है तो कंपनी प्रति दिन 250 वेन्टीलेटर का उत्पादन कर सकती है|