नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र के मूल तत्व हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे मुखर्जी ने विरोध प्रदर्शनों पर कहा कि देश में शांतिपूर्ण आंदोलनों की मौजूदा लहर एक बार फिर हमारे लोकतंत्र की जड़ों को गहरा और मजबूत बनाएगी। यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे प्रणब के इस बयान से बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा हो सकती है। दरअसल, बीजेपी और केंद्र सरकार ने ष्ट्र्र पर हो रहे प्रदर्शनों की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी ने आज ही कहा कि शाहीन बाग अब शेम बाग में बदल गया है, जहां नए कानून को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। वैसे, प्रणब के बारे में माना जाता है कि वह मोदी सरकार के प्रति नरम रुख रखते हैं। पीएम मोदी और उनके बीच संबंध काफी अच्छे हैं। यहां तक कि वह नागपुर में आरएसएस के एक कार्यक्रम में भी शरीक हो चुके हैं, जिससे कांग्रेस असहज स्थिति में आ गई थी। मोदी सरकार के दौरान ही प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था।