भोपाल।  मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस सहित दूसरे दलों की ओर से दिए गए प्रत्याशी सीटों में तीन लाख चालीस हजार से अधिक मतदाताओं को रास नहीं आए। शायद इसीलिए इतनी बड़ी संख्या  में मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है। लोकसभा चुनाव के दौरान 3,40, 984 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग तो किया है, लेकिन उन्होंने बटन नोटा का दबाया है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक जिन मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है, उनके मतदान का प्रतिशत 0.92 है। पिछले यानी वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में 3,91,837 मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया था, जो कुल मतदाताओं का 1.32 प्रतिशत था। यानी इस चुनाव में नोटा का बटन दबाने वाले मतदाताओं की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से कम है। पिछली बार की तुलना में इस बार 0.40 प्रतिशत कम लोगों ने नोटा दबाया है। अप्रैल और मई में हुए लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में नोटा चौथे नंबर पर था। भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरे नंबर पर बसपा को मत मिले हैं। इस चुनाव में भाजपा को 58 प्रतिशत, कांग्रेस को 34.50 प्रतिशत और बसपा 2.38 प्रतिशत मत मिले हैं। समाजवादी पार्टी और अन्य छोटे दलों को नोटा से भी कम वोट प्रतिशत हासिल हुए हैं। समाजवादी पार्टी को प्रदेश में कुल 82,662 यानी 0.22 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह नोटा से 0.70 प्रतिशत कम है। पिछले चुनाव में सतना ऐसी सीट थी, जहां पर कांग्रेस प्रत्याशी अजय सिंह को नोटा की वजह से हार का सामना करना पड़ा था। ऐसा इसलिए कि उनकी हार 8688 मतों के अंतर हुई थी और नोटा को 13036 वोट मिले थे। इस चुनाव में एक भी ऐसी सीट नहीं है, जहां पर नोटा ने जीत को प्रभावित किया है।