नई दिल्ली,  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तीसरी बार खुलने जा रहे सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की बात कहने वाली तृप्ति देसाई और उनकी 6 सहयोगियों को कोच्चि एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा. वहीं, केरल सरकार कोर्ट के फैसले पर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन विपक्ष राजी नहीं है.

केरल पुलिस सुरक्षा कारणों से तृप्ति और उनकी सहयोगियों को एयरपोर्ट से बाहर जाने नहीं दे रही. वह जब से एयरपोर्ट पहुंची हैं वहां पर उनका भारी विरोध हो रहा है. भारी संख्या में पुरुष और महिला एयरपोर्ट अराइवल लॉन्ज में तृप्ति देसाई के खिलाफ नारे लगा रहे हैं.

साथ ही वहां के ऑटो चालकों ने भी उन्हें मंदिर तक ले जाने से मना कर दिया है. ऑटो चालकों ने तृप्ति को कोट्टायम या फिर निलक्कल तक ले जाने से इंकार कर दिया है.
सबरीमाला मंदिर का गर्भगृह आज शाम पांच बजे खुलेगा. सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के आदेश के बाद सबरीमाला मंदिर तीसरी बार शुक्रवार शाम को खुलने जा रहा है. शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद कोई भी महिला श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते मंदिर में अब तक नहीं जा पाई है.

साथी यात्रियों का अनुरोध

कोच्चि एयरपोर्ट पर कई साथी यात्रियों ने 2 पत्र लिखकर तृप्ति से अनुरोध किया है कि वह परंपराओं का पालन करें. भगवान अयप्पा के लाखों भक्तों की भावनाओं को दुख न पहुंचाएं.

सोशल मीडिया पर लगातार धमकियों के बाद तृप्ति देसाई ने केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को पत्र लिखकर सबरीमाला स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में जाने के लिए सुरक्षा की मांग की थी.

तृप्ति देसाई ने इससे पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद वह 16 से 20 नवंबर के बीच सबरीमाला मंदिर में जाने की कोशिश करेंगी. अब, भूमाता ब्रिगेड ने विजयन को खत लिखकर 17 नवंबर को दर्शन के दौरान सुरक्षा की मांग की है.

उन्होंने बताया था कि राज्य में प्रवेश करने से लेकर वापस आने तक उन्हें सुरक्षा चाहिए होगी. उन्हें केरल आने पर 'बुरे परिणाम भुगतने' की धमकियां मिल चुकी हैं. कई लोगों ने खुदकुशी की धमकी भी दी है.

उन्होंने कहा था कि कई महिलाओं ने उनसे पहले जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस प्रोटेक्शन और समर्थन नहीं मिलने की वजह से वह नाकाम हो गईं. इसलिए मंदिर की सीढ़ियां बिना परेशानी के चढ़ने के लिए उन्होंने सरकार से सुरक्षा मांगी है.

अब तक महिलाओं की रही 'नो एंट्री'

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को जाने की इजाजत दी थी, लेकिन मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं के विरोध प्रदर्शन के चलते कोई महिला मंदिर में एंट्री नहीं ले सकी थीं.

तृप्ति देसाई ने कहा कि हमें पहले ही धमकियां मिल चुकी हैं. कुछ लोगों ने धमकियां दी हैं कि उन्होंने अगर केरल में प्रवेश किया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. कई लोगों ने धमकी दी है कि यह हम मंदिर की सीढ़ियां चढ़े तो वे आत्महत्या कर लेंगे.

सर्वदलीय बैठक नाकाम

दूसरी ओर, केरल में गुरुवार को सर्वदलीय बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जारी गतिरोध को समाप्त करने में विफल रही है जिसने सबरीमला मंदिर में माहवारी उम्र की महिलाओं को प्रवेश पर पाबंदी हटा दी है. सर्वदलीय बैठक में केरल सरकार कोर्ट के आदेश को लागू करने पर अड़ी रही जिस पर विपक्ष बैठक से चला गया.

दो महीने तक चलने वाले वार्षिक तीर्थाटन सीजन के लिए मंदिर खुलने से एक दिन पहले वहां अप्रत्याशित सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि अदालती फैसले पर फिर से प्रदर्शन की आशंका के बीच गुरुवार की अर्धरात्रि से एक हफ्ते तक सबरीमाला में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहेगी.

प्रवेश की कई कोशिशें नाकाम

अदालती आदेश को लागू करने को लेकर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार के फैसले के खिलाफ राज्य में कांग्रेस, बीजेपी, आरएसएस और दक्षिणपंथी संगठनों के कई प्रदर्शन हो चुके हैं.

कोर्ट के आदेश के बाद पिछले महीने से दो बार यह मंदिर खुला तथा कुछ महिलाओं ने उसमें प्रवेश की कोशिश की परंतु श्रद्धालुओं और विभिन्न हिंदू संगठनों के क्रुद्ध प्रदर्शन के चलते वे प्रवेश नहीं कर सकीं.

पुलिस के अनुसार महिला पुलिसकर्मियों समेत 15000 से अधिक पुलिसकर्मी इस सीजन के लिए तैनात किए जाएंगे. इस सीजन में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की आशा है.