भोपाल: कांग्रेस नेता और मध्‍य प्रदेश के दो बार मुख्‍यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने 28 नवंबर को होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी की चुनावी रैलियों से दूर रहने के संबंध में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत में कहा कि वह इसलिए प्रचार में नहीं जाते क्‍योंकि इससे पार्टी के वोट कटते हैं.सोमवार को कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक जीतू पटवारी के भोपाल स्थित सरकारी आवास पर मिलने पहुंचे दिग्विजय सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, ''मेरा नाम लिये बिना प्रचार-प्रसार कीजिए.''

दिग्विजय सिंह ने कहा, ''जिसको टिकट मिले, चाहे दुश्‍मन को मिले, जिताओ. और मेरा काम केवल एक, कोई प्रचार नहीं, कोई भाषण नहीं. मेरे भाषण देने से तो कांग्रेस के वोट कटते हैं, इसलिए मैं जाता नहीं.'' दिग्विजय सिंह इन दिनों पार्टी के प्रचार अभियान से दूर हैं. वह कभी-कभी पार्टी के मंचों पर नजर आ जाते हैं लेकिन भाषण नहीं देते.

मायावती ने गठबंधन नहीं होने के लिए दिग्विजय सिंह को बताया जिम्‍मेदार
इससे पहले मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस और बसपा के गठबंधन के कयासों पर विराम लगाते हुए मायावती ने कहा था कि उनकी पार्टी कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेगी. इसके लिए उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार ठहराया था. मायावती ने कहा था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी बसपा से गठबंधन चाहते थे, लेकिन दिग्विजय सिंह के चलते यह गठबंधन नहीं हो पाया. मायावती ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी.

 उन्होंने कहा कि भाजपा की महिला विरोधी, पूंजीपतियों की सहयोगी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ ही हमारी पार्टी ने गठबंधन करने का फैसला किया था. मायावती ने कहा, "जैसा उनकी पार्टी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, वैसा ही वह अन्य राज्यों में करेगी. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बसपा अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. हमारा कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा."

उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने गुजरात चुनाव परिणाम से कोई सबक नहीं लिया है. पिछले परिणामों से साफ पता चलता है कि जहां भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से रहा, वहां भाजपा ने आसानी से जीत दर्ज की." मायावती ने कहा कि कांग्रेस को गलतफहमी है कि वह अकेले ही भाजपा के साम, दाम, दंड, भेद और ईवीएम जैसी चालों से पार पाकर जीत हासिल कर लेगी, जो काफी हास्यास्पद है.