रांची: दो साल पहले आत्समर्पण करने वाले वाले एक पूर्व नक्सली का कहना है कि नक्सलवाद अब अपने सिद्धांतों से भटक गया है. दो साल पहले वह वांछित नक्सली था और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज थे. उसकी गिरफ्तारी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था. 43 वर्षीय पूर्व नक्सली ने मुख्यधारा में आने के बाद कहा कि नक्सलवाद अब अपने सिद्धांतों से भटक गया है. अब वह यहां पुलिस कार्यालय के कांफ्रेंस रूम की तरफ सादे कपड़े में जा रहा था जहां उसे कुछ पत्रकारों से मिलना था. वह उन दो आईपीएस अधिकारियों की तुलना में कम ‘मुख्यधारा’ का नहीं लग रहा था जिन्होंने उसे ‘मुख्यधारा में शामिल’ करने में अहम भूमिका निभायी थी.

पूर्व नक्सली ने 12 अप्रैल, 2016 को 20 वर्षों तक स्पेशल एरिया कमांडर रहने के बाद आत्मसमर्पण किया था. उसने कहा,‘‘मैं वहां घूटन महसूस कर रहा था और नक्सलवाद अब अपने सिद्धांतों से भटक गया है.’’जब उससे पूछा गया वह क्यों नक्सली बना और क्यों इससे बाहर आ गया? इस प्रश्न के साथ ही वह अतीत के गलियारे में चला गया.
उसने बताया, ‘‘वह 90 का दशक था. मैं कुछ माओवादी कम्यूनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के कार्यकर्ताओं के संपर्क में आया जो मेरे कॉलेज में बैठक के लिए आते थे.’’ वह शुरूआत में चतरा पुलिस के प्रस्तावित फायरिंग रेंज के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हो गया. ‘‘एमसीसी नेताओं ने उससे कहा कि रेंज के जमीन अधिग्रहण के लिए लोगों को विस्थापित किया जायेगा.

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उसे पीटा. आप कह सकते हैं युवाओं में उत्साह था और हमें हथियार उठाने के लिए उकसाया गया.’’ आईजी (अभियान) बत्रा ने उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बताते हुए कहा, ‘‘हमने उसे दो पूर्णकालिक हथियारबंद बॉडीगार्ड उपलब्ध कराये हैं.’’ पूर्व नक्सली ने कहा कि आत्मसमर्पण के वक्त उसके सिर पर 25 लाख रूपये का इनाम था. मैंने 23 महीने जेल में बिताये हैं और 9 मार्च 2018 को रिहा हुआ हूं.’’