ढाका: बांग्लादेश अगले महीने से एक लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को दूर दराज स्थित एक द्वीप में भेजना शुरू कर देगा. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. हालांकि, यह चेतावनी भी दी गई है कि द्वीप को खराब मौसम का सामना करना पड़ सकता है. प्रधानमंत्री शेख हसीना तीन अक्तूबर को इस द्वीप पर विस्थापित मुसलमानों के लिए नवस्थापित आश्रय केंद्रों को आधिकारिक रूप से खोलने वाली हैं. यह द्वीप बंगाल की खाड़ी में स्थित है. गौरतलब है कि अधिकारियों ने पहले कहा था कि वे लोग मॉनसून शुरू होने से पहले म्यामां की सीमा के पास स्थित द्वीप पर जून से शरणार्थियों को भेजना चाहते हैं.

नौसेना ने एक लाख शरणार्थियों के लिए आश्रय केंद्रों का निर्माण तेज कर दिया है और परियोजना का करीब तीन चौथाई हिस्सा पूरा हो गया है. अधिकारी हबीबुल कबीर चौधरी ने बताया कि शुरूआत में 50 से 60 रोहिंग्या परिवारों को अगले महीने से प्रथम चरण के तहत वहां ले जाया जाएगा. गौरतलब है कि द्वीप के पास तटीय इलाकों में पिछले 50 साल में हजारों लोगों की प्राकृतिक आपदा से मौत हुई है. 

भारत ने 11 लाख लीटर केरोसिन तेल की राहत सामग्री रोहिंग्याओं के लिए बांग्लादेश भेजी
आपको बता दें कि इससे पहलेे भारत ने हिंसा के कारण म्यांमार छोड़कर बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में ठहरे रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थियों के लिए सोमवार को बांग्लादेश को 11 लाख लीटर से अधिक केरोसिन तेल और 20,000 स्टोर समेत राहत सामग्री दी. म्यांमार से बड़े पैमाने पर रोहिंग्याओं के आ जाने से मुश्किल स्थिति में फंस गये बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने और म्यामां पर इस मुद्दे का समाधान करने के लिए दबाव डालने का आह्वान किया है. पिछले साल अगस्त से 7,00,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार के रखाइन प्रांत से भागकर बांग्लादेश चले गये.

अगस्त में ही म्यांमार में सेना ने रोहिंग्या मुसलमानों के कथित आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध अभियान चलाया था. बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त हर्षवर्द्धन श्रींगला ने बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन एवं राहत मंत्री मोफाज्जेल हुसैन चौधरी को 11 लाख लीटर केरोसिन तेल और 20000 केरोसिन मल्टीविक स्टोव सौंपे.