भगवान गणेश की उत्‍पत्ति को लेकर पुराणों में कई प्रकार की कथाएं बताई गई हैं। कहीं बताया गया है कि माता पार्वती के उबटन से गणेशजी बने तो कहीं कहा गया है कि भगवान शिव ने उन्‍हें गज रूप दिया है। आइए जानते हैं कि कैसे हुई बालक गणेश का जन्‍म…
एक बार शिवजी के गण नंदी द्वारा आज्ञा का पालन नहीं करने पर माता पार्वती नाराज हो गईं। तब उन्‍होंने ठान लिया कि मैं ऐसा पुत्र प्राप्‍त करूंगी जो मेरी आज्ञा का पालन करे और मेरी रक्षा करे। तब उन्‍होंने अपने शरीर के मैल और उबटन से अपने पुत्र का निर्माण किया। एक बार वह स्‍नान करने गईं और बाहर अपने इस पुत्र को खड़ा कर गईं। उन्‍होंने बालक को समझाया कि कोई भी अंदर न आने पाए। कुछ देर बात वहां भगवान शिव आए और माता र्पाती के पास जाने लगे तो उस बालक ने उन्‍हें रोकने का प्रयास किया। यह देखकर भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्‍होंने बिना कुछ सोचे समझे उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और अंदर चले गए।
माता पार्वती ने दो थालियों में भोजन परोसकर भगवान शिव को आमंत्रित किया। तब दूसरी थाली देख शिव ने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि यह किसके लिए है। पार्वती बोलीं, ‘यह मेरे पुत्र गणेश के लिए है जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है। क्या आपने आते वक्त उसे नहीं देखा?’
यह बात सुनकर शिव बहुत हैरान हुए और पार्वती को सारा वृत्तांत कह सुनाया। यह सुन देवी पार्वती क्रोधित हो विलाप करने लगीं। उनकी क्रोधाग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब सभी देवताओं ने मिलकर उनकी स्तुति की और बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा। तब पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काट कर बालक के धड़ से जोड़ दिया।