नई दिल्ली: भगवान गजाजन को देवताओं में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और सुखकर्ता कहा जाता है. यही नहीं वो रिद्धि-सिद्धि के दाता भी हैँ. वैसे तो धार्मिक ग्रंथों में भगवान गजानन को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए अनेकों स्तुति, मंत्रों का वर्णन हैं. गणेश महापुराण, गणेश सहस्त्रनाम स्त्रोत में कई श्लोक हैं. लेकिन कुछ खास, सरल और अचूक मंत्रों के द्वारा लंबोदर महाराज को जल्द से जल्द प्रसन्न किया जा सकता है. यही नहीं भक्तों की मनोकामना भी जल्द से जल्द पूरी हो सकती है. 
आचार्य कमल नयन तिवारी ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों में प्रथम पूज्य गजानन की कई स्तुतियां हैं, लेकिन मनवांछित फल प्राप्त करने के लिए कई अलग-अलग मंत्र हैं. पूजन करते समय इन मंत्रों के जाप से आपको मनचाहा फल प्राप्त होगा. 
पूजन के समय इन नामों का करें पाठ
गणेश पूजन के समय गणेश जी के कुछ विशेष नामों का पाठ करने से मंगलकारी भक्तों का मंगल करते हैं.

ॐ गणाधिपतये नमः, ॐ उमापुत्राय नमः, ॐ विघ्ननाशनाय नमः, ॐ विनायकाय नमः
ॐ ईशपुत्राय नमः, ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः, ॐ एकदन्ताय नमः, ॐ इभवक्त्राय नमः,
ॐ मूषकवाहनाय नमः, ॐ कुमारगुरवे नमः
विघ्न-बाधा दूर करने के लिए
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय .
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ..
सर्व सिद्धि के लिए
सर्व सिद्धि के लिए भक्तों को गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए. इसके पाठ से कार्य क्षेत्र में सफलता के साथ साथ लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. इसमें कुल 16 मंत्र हैं. सभी का पाठ करें तो बहुत ही उत्तम नहीं तो केवल इस मंत्र का पाठ करें.

एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्.
अभयं वरदं हस्तैर्विभ्राणं मूषकध्वजम्.
रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्.
रक्तगंधाऽनुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्..
मनोकामना पूर्ति के लिए
मनोकामना पूर्ति के लिए गणेश गायत्री मंत्र का पाठ करना सबसे कारगर होता है.

एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ..
विद्या, बुद्धि के लिए
एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, लिए तन्नो बुद्दि प्रचोदयात्.
संकट दूर करने के लिए
संकट दूर करने के लिए भगवान गणेश के संकट नाशक स्त्रोत का 11 बार पाठ करें. बड़ा से बड़ा संकट भी जल्द दूर हो जाएगा, और जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता मिल जाएगा. इसमे कुल 8 मंत्र है. हर रोज सुबह के वक्त इसका पाठ करें. इस स्त्रोत के पाठ से स्टूडेंट को विद्या, बुद्धि, धन चाहने वाले को धन, जबकि संतान की इच्छा रखने वालों को संतान सुख और मोक्ष चाहने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदतं द्वितीयकंम्. 
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्.. 
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च. 
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम्.. 
नवमं भालचद्रं च दशमं तु विनायकम. 
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननमं.. 

वहीं, जिन भक्तों को कोई मंत्र याद न हो, परेशान न हों, केवल एक महामंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' का पाठ करें. गणपति महाराज सभी मनोकामना जरूर पूरी करेंगे. अगर पूजन पाठ संभव न हो, तो भी कोई भी काम शुरू करने से पहले मन ही मन गणेश भगवान को प्रणाम कर लें. उनका नाम लेकर काम शुरू करें, सफलता जरूर मिलेगी.