नई दिल्ली। ई-कॉमर्स क्षेत्र में पैर पसारने की सोच रही रिलायंस ने दुनिया की दिग्गज ऑनलाइन रिटेल कंपनी अलीबाबा के साथ गठजोड़ का संकेत दिया है। फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट का सौदा पूरा होने के ठीक दो दिन बाद अगर यह सौदा होता है तो भारत के ऑनलाइन शॉपिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी और छोटे खिलाड़ियों का टिके रह पाना मुश्किल होगा। 

रिपोर्ट के मुताबिक, अलीबाबा रिलायंस रिटेल में 5-6 अरब डॉलर के निवेश के साथ करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी पर बातचीत कर रही है, ताकि फ्लिपकार्ट और अमेजन को टक्कर दी जा सके। अलीबाबा के कार्यकारी प्रमुख जैक मा और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी के बीच जुलाई के अंत में इस पर चर्चा की थी। 

सूत्रों का कहना है कि अलीबाबा लंबे समय से भारत के ऑनलाइन खरीदारी बाजार में सही साझेदार की तलाश में है। मोबाइल और ब्राडबैंड में पहले ही बड़ा आगाज कर चुकी रिलायंस इसके जरिये रिटेल बाजार में छाने की कोशिश करेगी। गोल्डमैन सॉक्स इस पर दोनों पक्षों को सलाह दे रही है। साझा उपक्रम परवान चढ़ता है तो भारत में यह चीनी कंपनी अलीबाबा का सबसे बड़ा निवेश होगा। फिलहाल अलीबाबा का पेटीएम में निवेश है, जिससे उसका ई कॉमर्स और डिजिटल वॉलेट कारोबार बढ़ा है। रिलायंस रिटेल भी यही रणनीति अपनाने जा रही है। 

अलीबाबा की ताकत

अलीबाबा की ताओबाओ और टीमॉल दुनिया में ऑनलाइन शॉपिंग के दो बड़े मंच हैं। इनका वर्ष 2016 में कारोबार 479 अरब डॉलर रहा है। ताओबाओ के 58 करोड़ और टीमॉल के 50 करोड़ से ज्यादा मासिक सक्रिय यूजर हैं। दोनों दुनिया की 20 सबसे ज्यादा देखी जाने वाली वेबसाइटों में हैं। 

फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट का सौदा

दुनिया की नंबर वन रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने हाल ही में भारत की शीर्ष ई कॉमर्स साइट फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सेदारी 16 अरब डॉलर में खरीदी है। इससे फ्लिपकार्ट को सबसे बड़ी रिटेल चेन के उत्पाद और विशेषज्ञता का फायदा मिलेगा। 

अमेजन भी पीछे नहीं

प्रतिस्पर्धा तेज होने के साथ अमेजन ने भी भारत में लॉजिस्टिक्स, उत्पादों की शृंखला को बढ़ाने के लिए 130 अरब रुपये का निवेश किया है। भारत में अमेजन 16 अरब डॉलर की ताकत के साथ कारोबार में दूसरी पायदान पर है।