मुंबई, बंगलूरू में काम करने वाली एक महिला के लिए शोक का दिन खुशी का दिन बन गया। जिस दिन उसने अपने पति को खोया था उसी दिन उसके बेटे ने जन्म लिया है। उसके बेटे का जन्म मुंबई के एक अस्पताल में हुआ। महिला पेशे से मार्केटिंग कंसलटेंट है। तकनीकी विकास ने उसके जीवन में ये खुशियां भरी है।

इस कहानी की शुरुआत हुई थी साल 2015 में। जब बंगलूरू में काम करने वाले 30 साल के दंपत्ति सुप्रिया जैन और गौरव एस ने एक बड़ा फैसला लिया। शादी के पांच साल बाद भी वह माता पिता नहीं बन पाए थे। इसके बाद उन्होंने आईवीएफ तकनीक की मदद ली। लेकिन प्रक्रिया शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही गौरव की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।

हादसे के बाद सुप्रिया ने अपनी पीड़ा एक ब्लॉग में लिखी कि किस प्रकार गौरव अपने परिवार से मिला और उन्हें जल्द ही कोई खुशखबरी देने की बात की। इसके बाद उसने अपने पति के बच्चे को जन्म देने का मन बनाया और डॉ. फिरूजा से मुलाकात की।

डॉक्टरों का कहना था कि ये सब बहुत मुश्किल था। बहुत मुश्किल से सुप्रिया के पति के स्पर्म को संभालकर रखा गया। डॉक्टर ने कहा कि इस बार वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थीं। कई बार एग्स फर्टिलाइज करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं बनी। जिसके बाद सरोगेट ढूंढने का फैसला किया गया। लोकिन जब सब उम्मीद खो चुके थे तब ये तरीका काम कर गया।

सुप्रिया बाली में थीं जब उन्हें पता चला कि सरोगेट मदर ने उनके बेटे को जन्म दिया है। सुप्रिया कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि उनका बेटा बिल्कुल उनके पति जैसा दिखता होगा। उसने कहा कि उसके लिए अच्छी बात तो ये है कि अब उसे गौरव की मौत के दिन शहर छोड़कर जाने का मन नहीं करेगा।