भोपाल । शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत लॉटरी के बाद जब एक अभिभावक अपने बेटे का एडमिशन कराने स्कूल पहुंचा तो प्रिंसिपल ने कहा कि हमारा स्कूल तो लड़कियों का है आपके बेटे को एडमिशन कैसे दे दें। दरअसल नेहरू नगर निवासी धर्मेंद्र तोमर ने अपने बेटे हर्षवर्धन के लिए आरटीई के तहत आवेदन किया था। जब स्कूल आवंटित हुआ तो उसे चंदनपुरा स्थित संस्कार विद्या निकेतन स्कूल आवंटित किया गया। अब वे जिला शिक्षा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। इस बार आरटीई के तहत राज्य शिक्षा केंद्र (आरएसके) द्वारा लापरवाही के बहुत मामले सामने आ रहे हैं।


इस तरह से अभिभावक हो रहे परेशान


केस 1) - स्कूलों को नहीं पहुंची लिस्ट


अभिभावक भागवत महाजन का कहना है कि दस्तावेज सत्यापन के बाद बिलाबांग स्कूल पहुंचा तो उनका कहना है कि अभी विभाग से लिस्ट नहीं मिली है। जब लिस्ट आएगी तो सूचना दे दी जाएगी।


केस 2) - दूर का स्कूल किया आवंटित


सूरजनगर निवासी कैलाश यादव कहते हैं कि उनके बेटे को घर से दूर का स्कूल का आवंटन मिला है, जब डीईओ कार्यालय गया तो वहां पर तीसरे ऑप्शन के स्कूल में जाने के लिए कह रहे हैं।


केस 3) - सत्यापन में परेशानी


नीलबड़ निवासी अजय साहू कहते हैं कि दस्तावेज सत्यापन में बहुत परेशानी हो रही है। राशन कार्ड की पात्रता पर्ची मांग रहे हैं। इसके लिए बीआरसी कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।


केस 4) - वार्ड 51 के बदले दे दिया वार्ड 61


अभिभावक रमेश मालवीय ने बताया कि उन्होंने वार्ड 51 के स्कूल के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें वार्ड 61 में स्कूल आवंटित किया गया है। स्कूल से घर की दूरी लगभग दस किमी है।


बीआरसी कार्यालय में नोडल अकिारी नहीं, 400 अभिभावक रोज परेशान 


राजधानी के कस्तूरबा स्कूल में बीआरसी कार्यालय बनाया गया है, लेकिन कोई भी नोडल अधिकारी ना होने से यहां आने वाले 300 से 400 अभिभावक हर रोज परेशान हो रहे हैं। यहां दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है।


बीआरसी कार्यालय में नोडल अधिकारी नहीं, 400 अभिभावक रोज परेशान 


राजधानी के कस्तूरबा स्कूल में बीआरसी कार्यालय बनाया गया है, लेकिन कोई भी नोडल अधिकारी ना होने से यहां आने वाले 300 से 400 अभिभावक हर रोज परेशान हो रहे हैं। यहां दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है।


इनका कहना है


लॉटरी में नाम निकलने से खुश थे कि बेटा बड़े स्कूल में पढ़ेगा, लेकिन ऑनलाइन आवंटन में लापरवाही कर बेटे को लड़कियों का स्कूल आवंटित कर दिया गया है। इसकी शिकायत की पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं - धर्मेंद्र तोमर, अभिभावक


आयोग में आरटीई के तहत एडमिशन में गड़बड़ियों से संबंति कई शिकायतें मिली हैं। एक लड़के को लड़की का स्कूल आवंटन करने का मामला भी आया है, जिसमें बीआरसी को पत्र लिखकर जांच करने की अनुशंसा की है - ब्रजेश चौहान, सदस्य, बाल आयोग


और यहां मंत्री साहब मानने को तैयार नहीं


आरएसके द्वारा किए गए ऑनलाइन आवंटन में लापरवाही के कई मामले जिला कलेक्टर कार्यालय में भी पहुंच रहे हैं। इसमें ग्वालियर, जबलपुर, सतना आदि दूसरे जिले के बीपीएल कार्ड पर राजानी के स्कूलों में आवंटन दे दिया गया है। जबकि नियम के मुताबिक जिस जिले का बीपीएल कार्ड है आवंटन भी वहीं मिलना चाहिए। हालांकि आरटीई एक्ट में इस साल संशोधन कर दूसरे जिले के बीपीएल कार्ड के जरिए मान्य किया गया है लेकिन इससे पहले आवेदक को लोकल ऐड्रेस प्रूफ देना होगा। श्रम विभाग से पंजीयन करवाना भी अनिवार्य होगा। लेकिन यह बनवाने में दो से तीन माह लगेगा। जब तक एडमीशन की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। आवेदक एडमिशन से वंचित भी हो सकता है।


इनका कहना है


आवेदक ने फार्म भरने में गलती की होगी। तभी उनको आवंटन में उनको परेशानी आ रही है। अगर दूसरे जिले के बीपीएल कार्ड वाले को यहां एडमिशन मिल रहा है तो इसमें गलत क्या है। वे बीपीएल कार्ड यहां का बनवा लेंगे -दीपक जोशी, राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा