बीजिंग डोकलाम विवाद के बाद आखिरकार अब चीन क्या चाहता है? वो सीमा पर अपनी गतिविधियों को पूरी तरह से बंद क्यों नहीं रखना चाहता है? क्या वो सीमा पर एक बार फिर से भारत से उलझने की तैयारी कर रहा है?


फिलहाल उसके रुख और गतिविधियों से साफ है कि वो सीमा पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जो भारत के लिए चिंताजनक हो सकता है. चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे तिब्बती काउंटी इलाके में बड़े पैमाने पर माइनिंग ऑपरेशन शुरू किया है.


चीन ने सीमावर्ती इलाकों पर अपने प्रभाव और नियंत्रण को बढ़ाने के मकसद से इसकी शुरुआत की है. रविवार को साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने इसकी जानकारी दी.


चीन अरुणाचल से सटे लुंजे काउंटी में करीब 60 अरब डॉलर के गोल्ड, सिल्वर और अन्य खनिज पदार्थों को निकालने का काम पहले से ही कर रहा है. इस बार चीन माइनिंग ऑपरेशन सीमा से सटे अपने इलाके में कर रहा है, जिसके चलते भारत की ओर से इसमें दखल की भी संभावना कम ही है.


दरअसल, चीन की निगाह अरुणाचल प्रदेश समेत भारत के अन्य सीमावर्ती इलाकों पर है. भारत और चीन के बीच निर्धारित सीमा नहीं है, जिसके चलते विवाद अक्सर पैदा होता रहता है. हाल के दिनों में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसका भारत ने लगातार विरोध किया है. इसके अलावा चीन हवाई सीमा का भी उल्लंघन करता रहता है.


अभी कुछ दिनों पहले ही भारत और चीन के बीच डोकलाम पर गतिरोध देखने को मिला था. यह करीब 73 दिनों तक चला था, लेकिन बाद में चीनी सेना को पीछे हटना पड़ा था और फिर विवाद शांत हो गया था. हालांकि भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है.


पीएम मोदी के हालिया अनौपचारिक चीन दौरे के समय भी सीमा विवाद अहम मुद्दा बना रहा. इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच सीमा पर बेहतर तालमेल को लेकर कदम उठाने पर बात हुई.


वहीं, चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किलोमीटर में अपना दावा जताता है. वो अरुणाचल प्रदेश को साउथ तिब्बत कहता है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि चीन विवादित दक्षिण चीन सागर की तर्ज पर यहां पर भी व्यापक स्तर पर माइनिंग ऑपरेशंस शुरू किया है, जिसका मकसद सीमावर्ती इलाकों में अपनी दावेदारी को मजबूत करना है.


चीन विवादित दक्षिण चीन सागर की तरह इस इलाके में भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगा हुआ है. उसने दक्षिण चीन सागर में द्वीप बनाए और अपना नियंत्रण कर रखा है. चीन शुरुआत में खनिज पदार्थों को निकालने के नाम पर मामूली शुरुआत की थी, लेकिन बाद में वहां पर सैन्य ठिकाने भी बना लिए.


हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सीमा विवाद पर अपना रुख भी साफ कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि वो एक इंच जमीन नहीं छोड़ेंगे. उनकी सेना दुश्मनों के खिलाफ खूनी जंग लड़ने के लिए तैयार है.


मालूम हो कि दक्षिण चीन सागर में चीन के अलावा कई देश अपना दावा जताते हैं. अमेरिका और भारत भी दक्षिण चीन सागर में चीन के नियंत्रण का विरोध कर रहे हैं.


चीन की गतिविधियों पर नजर रखने वाले लोगों का भी कहना है कि यह माइनिंग ऑपरेशन चीन की अरुणाचल पर नियंत्रण करने की साजिश का हिस्सा है. लुंजे इलाके में भी चीन की गतिविधियों का मकसद भी सीमा पर नियंत्रण करने की कोशिश का हिस्सा है.