भारत में बिना मिर्च के खाने का जायका अधूरा रहता है. कुछ लोग तो बिना मिर्च के खाना ही नहीं खाते. यहां तक की तीखी मिर्च के बिना इंडियन कुजिन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है.


मिर्च खाने वालों के लिए एक दिलचस्प खबर आई है, अब तक दुनिया की सबसे तीखी मिर्च के रूप में भूत जोकेलिया का नाम सबसे ऊपर आता था, लेकिन अब मणिपुर के कृषि वैज्ञानिक किशोर ने मिर्च की ऐसी किस्म विकसित की है, जिसका तीखापन भूत जोकेलिया से भी ज्यादा है.


इस नई किस्म की मिर्च को भूत जोकेलिया के साथ लोकल मिर्च के हाइब्रिड से तैयार किया गया है. इस नई मिर्च का नाम है किशोर फायर बॉल. मणिपुर के इस वैज्ञानिक को मिर्च की नई किस्म पैदा करने का शौक है और उनके इसी शौक ने देश को दी है मिर्च की एक नई किस्म, एक नया तीखापन. यही कारण है कि मिर्च की इस नई किस्म को उन्हीं के नाम पर किशोर फायर बॉल का नाम दिया गया है.

 

किसी भी मिर्च के तीखेपन को नापने के लिए स्कॉविल यूनिट का प्रयोग किया जाता है और इस नई मिर्च में तीखापन 287000 स्कॉविल यूनिट तक पाया गया है. वैज्ञानिक किशोर ने इसके बारे में बताया कि इस नई किस्म के एक पौधे से एक सीजन में 50 से 60 तक मिर्च मिल सकती है. नई किस्म की मिर्च में सबसे खास बात यह है कि इस मिर्च के खराब होने के चांस बाकी अन्य किस्म की मिर्च के मुकाबले में काफी कम है.



इससे पहले भारत में सबसे तीखी मिर्च के तौर पर भूत जोकेलिया को ही जाना जाता था. इस मिर्च को यू-मोरोक, लाल नागा या नागा जोकेलिया के नाम से भी जाना जाता है. भारत में इस मिर्च की खेती असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश आदि जगहों पर की जाती है.


साल 2007 में भारत की भूत जोकेलिया मिर्च को दुनिया की सबसे ज्यादा तीखी मिर्च माना गया था. तीखी मिर्च भूत जोकेलिया को मसालों के साथ औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके साथ ही इसका उपयोग सुअर के मांस और सूखी मछली को अधिक समय तक सुरक्षित बनाए रखने के लिए भी किया जाता है.


उत्तर पूर्वी भारत के राज्यों में हाथियों के हमलों से बचने के लिए घरों की दीवारों पर इसी मिर्च का लेप लगाया जाता है और साथ ही धुआं बम बनाने में भी इस भूत जोकेलिया मिर्च का ही उपयोग होता है.